रिपोर्ट डिवेलप इंडिया न्यूज़ टीम
हरिद्वार। जनपद हरिद्वार के थाना पथरी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम इब्राहिमपुर में स्थित देवभूमि पेपर मिल से निकलने वाले कथित जहरीले धुएं और दुर्गंध को लेकर ग्रामीणों में लगातार नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री की चिमनियों से निकलने वाला धुआं पूरे गांव और आसपास के क्षेत्रों में फैल जाता है, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत, घुटन और तेज बदबू का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने और संबंधित विभागों को पत्र भेजने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार, शाम और रात के समय फैक्ट्री से निकलने वाला धुआं अधिक मात्रा में फैलता है। इससे वातावरण प्रदूषित हो जाता है और लोगों को घरों के दरवाजे-खिड़कियां बंद रखने के लिए मजबूर होना पड़ता है। कई परिवारों का कहना है कि दुर्गंध के कारण सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है और बच्चों तथा बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि मिशन डेवलपमेंट इंडिया फाउंडेशन की “युवा टीम विकास की ओर, इब्राहिमपुर” ने भी इस मुद्दे को कई बार प्रमुखता से उठाया है। टीम की ओर से उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित संबंधित विभागों को कई बार लिखित शिकायतें भेजी गईं और फैक्ट्री के प्रदूषण स्तर की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई। इसके बावजूद अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में निराशा और आक्रोश है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रदूषण के कारण गांव में लगातार स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी, जुकाम, आंखों में जलन और गले में संक्रमण जैसी शिकायतें हो रही हैं। कुछ ग्रामीणों का दावा है कि लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने से गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई कि यदि समय रहते प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के आसपास खेती करने वाले किसानों पर भी इसका असर पड़ रहा है। उनका मानना है कि प्रदूषित हवा और धूल का असर फसलों की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। वहीं खुले वातावरण में रहने वाले पशुओं पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि देवभूमि पेपर मिल की चिमनियों से निकलने वाले धुएं की वैज्ञानिक जांच कराई जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि फैक्ट्री में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए गए उपकरण निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य कर रहे हैं या नहीं। यदि पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी उद्योग का विरोध करना नहीं है, बल्कि केवल स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में जीने का अधिकार सुनिश्चित करना है। उनका कहना है कि उद्योगों का संचालन पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप होना चाहिए ताकि रोजगार और विकास के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य की भी रक्षा हो सके।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीण लोकतांत्रिक तरीके से बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद यदि संबंधित विभाग कार्रवाई नहीं करते हैं तो इससे लोगों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर होता है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी हरिद्वार, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा अन्य संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि गांव में संयुक्त निरीक्षण कराया जाए, प्रदूषण के स्तर की स्वतंत्र जांच कराई जाए और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही यदि फैक्ट्री से निर्धारित मानकों से अधिक प्रदूषण फैलता पाया जाता है तो उसे रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं।
फिलहाल इब्राहिमपुर के ग्रामीण स्वच्छ हवा और स्वस्थ वातावरण की मांग को लेकर एकजुट हैं। उनका कहना है कि वे केवल इतना चाहते हैं कि उनके बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना न करना पड़े तथा गांव का वातावरण सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त बनाया जाए।
(नोट: इस समाचार में स्वास्थ्य संबंधी दावों और प्रदूषण के आरोप ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों एवं शिकायतों पर आधारित हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों या सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जानी शेष है।)




