रिपोर्ट अशरफ खान
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर CJP के बैनर तले आयोजित छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच तेज करते हुए बड़ा दावा किया है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल थे जिनका छात्र आंदोलन से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था और जिनके खिलाफ पहले से विभिन्न आपराधिक मामले दर्ज हैं।
दिल्ली पुलिस द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS), क्राइम-कुंडली और डोजियर के आधार पर कुल 2,873 व्यक्तियों की पहचान की गई है। इनमें 2,402 व्यक्तियों की पहचान क्राइम-कुंडली और 471 व्यक्तियों की पहचान डोजियर के माध्यम से किए जाने का दावा किया गया है।
पुलिस के अनुसार चिन्हित व्यक्तियों में 101 हत्या, 62 हत्या के प्रयास, 284 डकैती एवं लूट, 61 दुष्कर्म, 6 पॉक्सो, 25 महिलाओं से छेड़छाड़, 229 आर्म्स एक्ट, 135 स्नैचिंग, 19 अपहरण, 67 एनडीपीएस एक्ट तथा 1,884 आईपीसी/बीएनएस एवं अन्य विशेष कानूनों से जुड़े मामलों में नामजद या आरोपित व्यक्ति शामिल बताए गए हैं। पुलिस का यह भी कहना है कि कई लोगों के खिलाफ एक से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर शुरू हुआ छात्र आंदोलन बाद में हिंसक हो गया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए। घटना के बाद यह सवाल उठने लगे कि शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन में ऐसे लोग कैसे शामिल हो गए जिनका आंदोलन से कोई सीधा संबंध नहीं था।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, फेस रिकग्निशन सिस्टम, तकनीकी साक्ष्यों और अन्य जांच के आधार पर उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान की गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि हिंसा में शामिल पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
नोट: यह समाचार दिल्ली पुलिस के दावों पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही मानी जाएगी।यदि चाहें, मैं इसे LNI प्रेस शैली में आकर्षक हेडलाइन, सब-हेडलाइन और सोशल मीडिया पोस्ट के प्रारूप में भी तैयार कर सकता हूँ।




