रिपोर्ट अशरफ खान
मंगलौर/हरिद्वार। हरिद्वार पुलिस ने बूढ़पुर जट्ट में हुए चर्चित गोलीकांड का सफल खुलासा करते हुए हत्या की गुत्थी सुलझा ली है। पुलिस जांच में सामने आया कि जिन तीन लोगों पर हत्या का आरोप लगाया गया था, वे निर्दोष थे। असलियत यह निकली कि मृतक के साथ मौजूद उसके तीन साथियों ने ही घटना के बाद पुरानी रंजिश का फायदा उठाकर अन्य लोगों को झूठे हत्या के मुकदमे में फंसाने की साजिश रची थी।
11 जुलाई 2026 की शाम बूढ़पुर जट्ट के एक खेत में सौरभ पुत्र राजेन्द्र निवासी बूढ़पुर जट्ट को गोली लगने की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और उसे अस्पताल भिजवाया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक के परिजनों की तहरीर पर रोबिन, अनुज और प्रदुमन के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया।
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए एसएसपी हरिद्वार के निर्देश पर गठित विशेष पुलिस टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। विवेचना में पाया गया कि घटनास्थल से मिले साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रारंभिक तहरीर से मेल नहीं खा रहे थे।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि मृतक सौरभ अपने साथियों के साथ एक अवैध तमंचा लेकर बूढ़पुर जट्ट पहुंचा था। तमंचे को खोलकर जांचने के दौरान अचानक गोली चल गई, जो सौरभ को लग गई और उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसके साथियों ने पुरानी रंजिश के चलते शकरपुर (मुजफ्फरनगर) के कुछ लोगों को झूठा फंसाने के लिए मनगढ़ंत कहानी बनाकर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया।
पुलिस ने सच्चाई सामने आने के बाद सुमित, डिम्पल और आशीष को हिरासत में लेकर घटना में प्रयुक्त तमंचा बरामद कर लिया। विवेचना में तथ्य स्पष्ट होने पर मुकदमे में आवश्यक वैधानिक संशोधन करते हुए गैर-इरादतन हत्या सहित संबंधित धाराएं जोड़ी गई हैं। तीनों आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस टीम का नेतृत्व प्रभारी निरीक्षक भगवान महर ने किया, जबकि वरिष्ठ उपनिरीक्षक सुखपाल सिंह मान, उपनिरीक्षक आनंद मेहरा, उपनिरीक्षक मंसूर अली तथा अन्य पुलिसकर्मियों ने मामले के खुलासे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।




