लेटेस्ट न्यूज़
Home » लेटेस्ट न्यूज़ » संस्कृत भारत की विरासत ही नहीं, विकसित भारत के भविष्य का आधार : कुलपति रमाकांत पांडेय

संस्कृत भारत की विरासत ही नहीं, विकसित भारत के भविष्य का आधार : कुलपति रमाकांत पांडेय

Picture of Develop India News

Develop India News

DevelopIndiaNews.com एक स्वतंत्र और विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ पोर्टल है, जिसका उद्देश्य देश और दुनिया की ताज़ा, सटीक और निष्पक्ष खबरें पाठकों तक सबसे तेज़ पहुँचाना है।

रिपोर्ट मुजम्मिल खान

हरिद्वार, 6 अक्टूबर। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में ‘सेवा संकल्प अभियान–विकसित भारत 2047’ के अंतर्गत ‘संस्कृत–भारत की विरासत, भविष्य का आधार’ विषय पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से संस्कृत की गौरवशाली परंपरा, भारतीय ज्ञान-विज्ञान तथा भारतीय संस्कृति में संस्कृत के महत्वपूर्ण योगदान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय ने कहा कि संस्कृत भारत की ज्ञान एवं सांस्कृतिक परंपरा की आधारभूत भाषा है। विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने के लिए युवा पीढ़ी को संस्कृत तथा भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

नोडल अधिकारी प्रो. बिंदुमती द्विवेदी ने कहा कि संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन के माध्यम से भारतीय ज्ञान-विरासत को भावी पीढ़ी तक पहुंचाना राष्ट्रसेवा का महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने युवाओं को संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने का आह्वान किया।

 

सह-नोडल अधिकारी मीनाक्षी सिंह रावत ने कहा कि युवाओं की सक्रिय सहभागिता से संस्कृत को नई पीढ़ी से जोड़ने तथा इसके व्यापक प्रचार-प्रसार को गति दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में अपनी संस्कृति और ज्ञान परंपरा के प्रति जागरूकता पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

कार्यक्रम संयोजक डॉ. राजेश चन्द्र सती ने कहा कि नुक्कड़ नाटक के माध्यम से संस्कृत के महत्व और विकसित भारत के निर्माण में इसकी भूमिका का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक माध्यमों के जरिए युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना इस अभियान का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

 

कार्यक्रम के अंत में डॉ. अनूप बहुखंडी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

 

इस अवसर पर डॉ. रूपेश शर्मा, डॉ. परविंदर, डॉ. धीरज, पुस्तकालय अध्यक्ष मनमीत कौर, निजी सचिव मनोज गहतोड़ी सहित विश्वविद्यालय के आचार्य, शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

Leave a Comment

Leave a Comment

इस पोस्ट से जुड़े हुए हैशटैग्स